बुधवार, 8 अगस्त 2012

व्याख्या


कुछ साथ
आदत
बन जाते है,
और बदल देते है
रास्ते ..
बन कर ख्वाब
बिछ जाते है ,
आँखों की नमी में,
और दे जाते है
एक सुनहरी दुनियां,
जहाँ सम्बन्ध
व्याख्या
के मोहताज नहीं होते ,
मुकद्दर
कुछ नहीं
बिगाड़ पाता उनका ,
और वो
अव्याख्यित
रिश्ते बन जाते है
जीवन का
सबसे बड़ा
सच,
मै ,तुम की
परिधि
से परे........


5 टिप्‍पणियां:

  1. right you are there...ye anam, awyakhaytit rishte bade madhur hote hain and the sweetness lingers on in our memory

    उत्तर देंहटाएं
  2. मधुरिमा जी ,आभार आपका .........कविता के मर्म को समझा आपने ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह बहुत सुंदर.....इसीलिये अब मै और तुम नही बल्कि "हम" है। :)

    उत्तर देंहटाएं