कुछ भाव जो व्यक्त नहीं कर पाई, कुछ दर्द जो बाँट नहीं पाई,अब लेखनी से वो सारे पल जीना चाहती हूँ,जो इस जीवन की भागदौड में कहीं बहुत पीछे रह गए किन्तु टीसते रहे.......
डरती हूँ पाने से क्योकि खोना भी जुड जाता है साथ में,
जब तक मै तुम्हे पाऊँगी नहीं, कम से कम खोने का भय तो नहीं रहेगा.
ऐसा ही रिश्ता अच्छा है हमारा, खोने पाने के समीकरण से दूर ...