तुम्हारी नजर मे भले ही गुण हो
चाँद का शीतल होना
पर छटपटाता है वो
दग्धता के लिए ..
सूर्य होना चाहता है शीतल
और पृथ्वी बरसाना चाहती है जल
आकाश ढूढ़ रहा है उर्वरता को
कि उसमें लहलहाएं फसलें
पक्षी तैरने को छटपटा रहे हैं
जलचर पाना चाहते हैं नभ
हाँ कतई जरूरी नहीं
कि जिसका गुण
प्रभावित करे तुम्हें
वह खुद से खुश हो ..
अक्सर गुण बन जाते है
सबसे बड़ा अवगुण ..
यहां सब उलट है
ये दुनिया अपने होने से
कब खुश थी
कब खुश है
कब खुश होगी ...
कुछ भाव जो व्यक्त नहीं कर पाई, कुछ दर्द जो बाँट नहीं पाई,अब लेखनी से वो सारे पल जीना चाहती हूँ,जो इस जीवन की भागदौड में कहीं बहुत पीछे रह गए किन्तु टीसते रहे.......
बुधवार, 14 अक्टूबर 2015
गुण ...
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