"बस तुम्हारे लिए "
काती है
एक चादर दर्द की ,
जिस्म के रेशों से
बने सूत को
लहू के रंग से
लाल किया है ,
भावनाओं के फूलों की
अश्को से कढ़ाई की है ,
जड़े हैं कलेजे के टुकड़ो में
प्रेम के मोती .
सजाई है वर्षों के
इंतजार का गोटा
लगा कर
"बस तुम्हारे लिए "
कुछ भाव जो व्यक्त नहीं कर पाई, कुछ दर्द जो बाँट नहीं पाई,अब लेखनी से वो सारे पल जीना चाहती हूँ,जो इस जीवन की भागदौड में कहीं बहुत पीछे रह गए किन्तु टीसते रहे.......
चादर दर्द की लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चादर दर्द की लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
बस तुम्हारे लिए
सदस्यता लें
संदेश (Atom)