सुनी है न तुमने
साँप और नेवले
वाली कहानी ,
गलतफहमियों का
अंत हमेशा
अफसोस पर
आकर खत्म होता है
और अफसोस का
कभी अंत नही होता
लाख सर पटका उसने
नेवला मर चुका था ,
मरे हुए रिश्ते
अफसोस
से जी न उठेंगे ,
जिंदा रहेगा
झूठा अहंकार ,
टूटा स्वाभिमान ,
खोखला वजूद
और न भर सकने
वाला खालीपन ....
कुछ भाव जो व्यक्त नहीं कर पाई, कुछ दर्द जो बाँट नहीं पाई,अब लेखनी से वो सारे पल जीना चाहती हूँ,जो इस जीवन की भागदौड में कहीं बहुत पीछे रह गए किन्तु टीसते रहे.......
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शुक्रवार, 23 अगस्त 2013
गलतफहमी
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